अनकहा पुरुष ( स्वैच्छिक)
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अनकहा पुरुष ( स्वैच्छिक)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
"अनकहा पुरुष" समर्पित उन सभी पुरुषों को, जो बिना कुछ कहे… हर रिश्ते का भार, हर दिल की उम्मीद… अपने सीने में लिए चलते हैं।
लेखक : तृप्ति सिंह
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