तुम मेरी हो(स्वैच्छिक)
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तुम मेरी हो(स्वैच्छिक)
कविता
प्रेम कहानी
न कोई दावा, न कोई शर्त हो, बस तेरा नाम, और तुझसे मोहब्बत हो। जी लूँगा हर दर्द, हर खोई खुशी को, अगर तू ये कह दे — तुम बस मेरे हो।
: rani
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