वो पागल थी
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वो पागल थी
कविता
रोजाना प्रकाशित
काँच की चूड़ियों से सपने बुनती, टूटे खिलौनों में खुशियाँ ढूंढती। लोग कहते थे, "वो पागल है," पर वो तो बस सच्ची थी।
: Writer Dev
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