तू अब वो नहीं
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तू अब वो नहीं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
उसे पाने की ख्वाहिश बहुत थी मगर , लेकिन तू अब वो नहीं , जरूरत से ज्यादा चाहा था जिसे , खुद से ज्यादा परवाह थी उसकी ,
: Mahima
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