तुम अब वो नहीं हो
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तुम अब वो नहीं हो
कविता
कविता
जैसे मौसम बदलते हैं, वैसे ही तुम भी बदल गई। हर मौसम की अपनी एक खूबसूरती है, पर तुम्हारी खूबसूरती अब भी बरकरार है।
: rani
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