टूटा हिस्सा हूं मैं
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टूटा हिस्सा हूं मैं
कविता
ये टूट फूट कर भी मेरा ख्वाब सजाए बैठा है पत्थर तो कब का हो जाता पर एहसान दिखाए बैठा है
लेखक : Nayii Kalam
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