अनकहा दर्द
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अनकहा दर्द
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
एक औरत (एक बेटी ,एक मां एक पत्नी ) हर रूप में अपनी खुशियों और अपने सपनो को त्यागकर अपना परिवार सजाती है। पर इस कविता के माध्यम से एक मां अपनी बेटी के दिल का हाल बिना उसके बताए समझ रही है ,क्योंकि जहां आज इसकी बेटी है कल वो भी खड़ी थी।
लेखक : Charu
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