राघव का दिल अपने सच्चे प्यार साक्षी से बिछड़कर टूट जाता है। अकेलेपन और दर्द से जूझते हुए वह खुद को फिर से संभालना सीखता है। अपने टूटे जज़्बातों को कविता में ढालकर वह नयी पहचान बनाता है। इसी सफर में उसे अन्वी मिलती है, जो उसे फिर से जीना और मुस्कुराना सिखाती है। राघव समझता है कि टूटा दिल भी दोबारा प्यार कर सकता है और जिंदगी फिर से खूबसूरत बन सकती है।