बुढ़ापे का सहारा
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बुढ़ापे का सहारा
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
बुढ़ापे की थाती है सबसे सच्ची बाती। आज की थकन से जो जोड़े सपने, कल का आराम उन्हीं राहों से अपने।
: Erica
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