पतझड़
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पतझड़
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी कभी जब हम झड़ते हुए पत्तों को देखते हमारा दिल कभी उदास जा हो जाता के कैसे हम इस झड़े हुए पत्तों की तरह है क्योंकि कुछ चीजें याद आने लगती है जो बहुत तकलीफ देतहई।
लेखक : Aamir
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