पर कोई आवाज़ न थी
Added Successfully to library!
पर कोई आवाज़ न थी
कविता
कतरा कतरा जी रहें हैं बस , धीरे धीरे सब भूल जायेंगे...; मेरे गम साथ में हैं मेरे, बाकी सब साथ छोड़ जायेंगे !!
लेखक : Nayii Kalam
Add To Library
17
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप