मेरी आखिरी मुहब्बत
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मेरी आखिरी मुहब्बत
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ना पहली , ना दूसरी हो , तुम मेरी वो मुहब्बत हो , जो मेरी आखिरी मुहब्बत है , मेरी आखिरी सांस तक दिल पर जिसका पहरा होगा , जिसका नाम मेरे लबों पर होगा , भले ही हाथों की लकीरों में न हो ,
: Mahima
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