चूड़ियां
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चूड़ियां
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
खनकती हैं चूड़ियाँ धीरे-धीरे, जैसे दिल की बातें कहें धीरे-धीरे। हर रंग में बसी है कहानी, प्यार, उम्मीद और सुहाग की निशानी। सिर्फ़ गहना नहीं, ये उसकी शान हैं, सुहागन के मन की ये पहचान हैं।
लेखक : Simple Human
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