टूटता ख्वाब
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टूटता ख्वाब
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
यह कविता एक ऐसे सपने की कहानी है जो बहुत प्यारा और अपना सा लगता है, लेकिन हकीकत की ठोकर से बिखर जाता है। कविता में भावनाओं, आशाओं और टूटते अरमानों को सरल भाषा में पिरोया गया है, जो हर दिल को छू जाता है।
लेखक : विजय सांगा
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