टूटे हुए ख्वाब
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टूटे हुए ख्वाब
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कुछ रंग थे जीवन में , कुछ नए सपने संजोए थे , कुछ ख्वाब इन आंखों में बसते थे , रंगों से भरी ख्वाबों की दुनिया की , वो अनजान सी बेफिक्र लड़की ने ,
: Mahima
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