दिल अभी बच्चा सा है
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दिल अभी बच्चा सा है
कविता
मुझे न तोलो अपनी पैनी नज़रों से .. दिखूं कुछ भी मैं रुस्तम भी तो हो सकती हूं छुपा रखा है बहुत कुछ ख़ुद में यूं तो दिखती हूं मैं बड़ी पर बच्चा हो सकती हूं...!
लेखक : Nayii Kalam
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