बिन तेरे अधूरे

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बिन तेरे अधूरे


श्रेया मेहरा, सफलता और ताकत की मिसाल, अपनी मेहनत और त्याग से मेहरा ग्रुप की सीईओ बनी है। लेकिन पारिवारिक परंपरा उसके करियर पर खतरा बनकर खड़ी है—25 की उम्र तक शादी न करने पर वह अपनी सीईओ की कुर्सी खो सकती है। इसी दबाव के बीच उसकी मुलाकात आरव शर्मा से होती है, जो कई छोटे-मोटे काम कर अपना गुजारा करता है। उनकी पहली मुलाकातें टकराव और गलतफहमियों से भरी होती हैं, लेकिन हालात उन्हें एक समझौते की ओर ले जाते हैं।श्रेया आरव को एक अनुबंध विवाह का प्रस्ताव देती है—सिर्फ समाज के लिए, बिना किसी निजी दखल के। आरव अनमने मन से यह रिश्ता स्वीकार करता है। लेकिन जैसे-जैसे वे साथ रहते हैं, नफरत की जगह समझ और परवाह लेने लगती है। दोनों के बीच अनकहे एहसास जन्म लेते हैं, लेकिन परिवार का विरोध और अतीत की परछाइयाँ उनके रिश्ते को चुनौती देती हैं। क्या यह समझौता सच्चे प्यार में बदलेगा, या फिर उनकी दुनिया अलग ही रहेगी? श्रेया आरव को एक अनुबंध विवाह का प्रस्ताव देती है—सिर्फ समाज के लिए, बिना किसी निजी दखल के। आरव अनमने मन से यह रिश्ता स्वीकार करता है। लेकिन जैसे-जैसे वे साथ रहते हैं, नफरत की जगह समझ और परवाह लेने लगती है। दोनों के बीच अनकहे एहसास जन्म लेते हैंक्या यह समझौता सच्चे प्यार में बदलेगा, या फिर उनकी दुनिया अलग ही रहेगी?

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