नेहा को प्यार में धोखा मिलता है जब प्रतीक उसका इस्तेमाल कर छोड़ देता है। टूटने के बाद वो खुद को दोबारा खोजती है, कबीर नाम के एक सच्चे दोस्त का साथ पाती है और फिर एक फाउंडेशन शुरू करती है जहाँ वो दूसरों को भी टूटकर फिर से जीना सिखाती है। उसकी ज़िंदगी धोखे से शुरू होकर उम्मीद और हिम्मत पर खत्म होती है।