वह निर्दोष थी। वह निर्दयी था। उनकी किस्मत बदले की आग में टकराई।
अभिराज सिंह राजपूत का दिल दर्द और गुस्से से भरा था। उसे बस एक ही मकसद था—अपनी बहन आकांक्षा की बरबादी का बदला लेना। उसे लगा कि चित्रांगदा शर्मा ही उसकी बहन की बर्बादी की वजह है। गुस्से में उसने एक खतरनाक फैसला लिया—उसने चित्रांगदा को जबरदस्ती अगवा करके शादी कर ली। उसने उसे अपने अंधेरे और खतरनाक दुनिया में कैद कर लिया।
अब चित्रांगदा एक ऐसे रिश्ते में फंसी थी जो दर्द और बदले पर बना था। क्या अभिराज अपनी गलती समझ पाएगा इससे पहले कि बहुत देर हो जाए? या फिर उसका गुस्सा उसे हमेशा के लिए खो देगा जो उसे बचा सकती थी?