लाहौर की तंग गलियों में एक छोटा-सा घर था, जहाँ महरुश अपने वालिदैन के साथ रहती थी। वह जितनी हसीन थी, उतनी ही समझदार और बहादुर भी। उसके अब्बू उसे बहुत प्यार करते थे और उसकी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करते थे। लेकिन उसकी अम्मी को हमेशा उसकी शादी की फिक्र रहती थी।