"नफ़रत के साए में मोहब्बत"

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"नफ़रत के साए में मोहब्बत"


अनन्या और आदित्य—दो नाम, जिनके बीच सिर्फ़ नफ़रत की आग नहीं थी, बल्कि एक अधूरी मोहब्बत भी थी। बदले की ज़ंजीरों में जकड़ा एक रिश्ता, जहाँ दिल टूटते रहे, पर जुबां ने कभी सच बयां नहीं किया। आदित्य की आँखों में जलती हुई नफ़रत थी, लेकिन हर बार जब वह अवनि को तकलीफ़ देता, तो उसका अपना दिल भी लहूलुहान हो जाता। दूसरी तरफ, अवनि जो कभी उसकी बाहों में सुकून ढूँढती थी, अब उसकी हर साज़िश का जवाब देने के लिए तैयार थी। लेकिन क्या सच में यह सिर्फ़ नफ़रत थी? या फिर किसी अनकही मोहब्बत की गहरी परछाई? जब तक बदले की आग में जलकर राख न हो जाए, तब तक यह जंग खत्म नहीं होगी। लेकिन जब दिल ही जलने लगे, तो जीत किसकी होगी—इश्क़ की या नफ़रत की? एक इंटेंस, इमोशनल और सस्पेंस से भरी कहानी, जहाँ हर मोड़ पर रिश्तों का इम्तिहान होगा।

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