अगर पंख होते
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अगर पंख होते
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मैं लड़का हूँ, पर बंधन मेरे भी हैं, हर कदम पर कसौटी खड़ी है। हौसले मेरे आसमां छूते हैं, पर ज़िम्मेदारी की दीवार बड़ी है।
: Erica
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