अनकही उदासी
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अनकही उदासी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये अनकही उदासी न दिखाई देती है , चाह कर भी न जताई जाती है .. दिल में न जाने कितने ऐसे ज़ख्म है , जो दिल को पत्थर बना देते है ..
लेखक : Jasmita Bhuyan
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