अनकही उदासी

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अनकही उदासी


फिर से उसका जिक्र हुआ , जिसे गुजरे जमाना हुआ , आज फिर से मेरी उदास आंखों ने बयां किया , उसके जाने या आने से कुछ फर्क नहीं पड़ता है , लेकिन उसकी  अनकही बातें याद आती हैं , जो कभी मेरी उदासी का कारण जान लिया करती थी
: Mahima

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