अनकही उदासी
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अनकही उदासी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
फिर से उसका जिक्र हुआ , जिसे गुजरे जमाना हुआ , आज फिर से मेरी उदास आंखों ने बयां किया , उसके जाने या आने से कुछ फर्क नहीं पड़ता है , लेकिन उसकी अनकही बातें याद आती हैं , जो कभी मेरी उदासी का कारण जान लिया करती थी
: Mahima
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