कोई तो ऐसा हो
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कोई तो ऐसा हो
कविता
कविता
कभी कभार बेसब्र होकर मैं रूठ खुद से तो , चाहती हूं कोई तो हो जो मनाए मुझे , अपने बातों के अपनेपन के एहसास से प्यार जताएं कोई तो ऐसा हो जो मुझे पसंद आए , मैं खुद की उलझनों से ऊब गई हूं ,
: Mahima
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