सुमन की शादी आदित्य से होती है, लेकिन वह जल्द ही महसूस करती है कि यह रिश्ता केवल एक सामाजिक बंधन है, जिसमें भावनाओं की जगह नहीं है। आदित्य का व्यवहार उसके प्रति ठंडा रहता है, और बाद में सुमन को पता चलता है कि वह किसी और से प्यार करते थे और यह शादी सिर्फ परिवार के दबाव में हुई थी।
इस सच्चाई से आहत होकर सुमन खुद को मजबूत बनाती है और आदित्य से स्पष्ट कहती है कि वह किसी ऐसे रिश्ते में नहीं रह सकती, जिसमें उसकी कोई जगह न हो। धीरे-धीरे, आदित्य को एहसास होता है कि सुमन सिर्फ उसकी पत्नी ही नहीं, बल्कि उसकी सबसे अच्छी दोस्त भी बन सकती है।
अंत में, आदित्य सुमन से एक और मौका मांगता है, यह वादा करते हुए कि इस बार वह सच में कोशिश करेगा। सुमन, जो अपने आत्मसम्मान के साथ खड़ी थी, सोचती है कि कुछ दहलीजें पार करने के लिए ही होती हैं, ताकि इंसान अपने असली मुकाम तक पहुंच सके।