एक कलाम लिखा है सुनोगी क्या?
दिल का अरमान लिखा है सुनोगी क्या ?
तुमसे गुफ्तगू करने का मन नहीं करता
एक जज्बात नया है
सुनो,रुकोगी क्या?
तेरे कहने का आलम है इस जहाँ में
तेरा नाम सबसे पहले लिखा है
सुनो,पढ़ोगी क्या
लगता नहीं है अब दिल मेरा तेरे बिना
सुनो,अपना नाम लिखोगी क्या
हर बात नहीं आती कहनी मुझको
दिल को जवाब देना सिखाओगी क्या
हर बात पर वफ़ा वफ़ा कहते है
सुनो, वफ़ा दिखाओगी क्या
एक उम्र गुजार रखा है तेरे बिना
एक नई उम्र जीना सिखाओगी क्या
सुनो, जान से भी ज्यादा चाहते है तुमको
जान बन कर साथ निभाओगी क्या
एक वादा है किया दिल रखने का मैंने
सुनो,वादे को पूरा निभाओगी क्या
ले रखी है जमीन आशियाने के लिए
उस पर एक छोटा मकान बनोगी क्या
देखते देखते मन नहीं भरा क्या
सुनो, जरा एक बार मुस्कुराओगी क्या
रफ्ता रफ्ता गुजर रहा है हर एक पल
एक पल में सौ खुशियाँ बसाओगी क्या
मेरा दिल दे रहा है उलाहने मिलने को
पूछ रहा हूँ एक बार मिलने आओगी क्या
सुनो,आ भी जाना तो किसी को बताना मत
चुपके से मुझको डराओगी क्या
हर बात की कवायत हम नहीं करते
अल्फाज़ो में वक़्त बिताओगी क्या
कई लोगो को साथ देख कर तुम याद आये
उन यादों से निकल कर दिल मिला कर
एक नया रास्ता दिखाओगी क्या
सुनो,माशूका हो
क्या आशिकी कर सकते है
मुहब्बत में मरना सिखाओगी क्या
दिल्लगी का आस दिखाओगी क्या
मुझे अपने पास बैठाओगी क्या
इन कातिलाना निगाहों की कुछ तहजीब है
क्या उस तहजीब से मुझको मिलओगी क्या
न बात करनी है आती मुझको
सुनो,बात करना मुझे सिखाओगी क्या
क्या अदब है आज तुम से
सुनो, नया अदब सिखाओगी क्या
कुछ नया आलम है आज तेरे इस दीवाने में
सुनो, मुझको दीवाना बनोगी क्या