तेरी आंखें... छुपे राज बताती हैं...
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तेरी आंखें... छुपे राज बताती हैं...
कविता
जब कहीं अचानक किसी मोड़ पर वो मिल जाती है कभी झूठी मुसकुराहट तो कभी नज़र बचाती है जब पूछ लूं उसका हाल हाथ पकड़ कर पहले रोती है, फिर मुस्कुराती है....
लेखक : Nayii Kalam
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