उम्मीद
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उम्मीद
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी कभी होता है ना की हर जगह से हार मिलती है ना तब सब उम्मीद मर जाती है जैसे लगता है हम सब कुछ हार गए और ना जाने कहां से एक उम्मीद आती है सब कुछ पहले जैसा हो जाता है
: Saraswati
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