अपने निर्जीव शरीर को नदी में बहता हुआ देखकर जुगनू को समझने में देर नहीं लगती है कि इस रेल दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई है और उसकी आत्मा उसके शरीर से बाहर निकल गई है और जैसे ही वह कविता उसकी मां के विषय में सोचता है तो उसकी आत्मा तुरंत उनके पास पहुंच जाती है।
कविता जुगनू को देखकर ऐसे नाराज होकर बोलती है जैसे प्रेमिका या पत्नी नाराज होकर बोलती है "कम से कम हम तीनों कोई संकट आने पर एक दूसरे की मदद तो कर सकते हैं, यह बात आपको सोचनी चाहिए और अब आप दिल्ली के शहरी माहौल में रह रहे हैं और मुझे पक्का यकीन है अब तक आप भूल चुके हो की जंगल जंगली जानवरों से कैसे निपटा जाता है फिर क्यों हमें छोड़कर अचानक गायब हो गए थे।"
कविता को अपनी चिंता करना कविता का उसे अपनापन दिखाना जुगनू को बहुत अच्छा लगता है, इसलिए वह यह ना बताने की उसकी मृत्यु हो चुकी है अपने मन में ठान लेता है, इस वजह से की कविता और कविता की तुलसी मां को जीवित सुरक्षित इस घने जंगल से बाहर निकलने पर ही मेरी बेचैन आत्मा को शांति मिलेगी।
और इसके साथ जुगनू को यह भी डर था कि उसकी मौत की सुनकर कविता बहुत दुखी हो जाएगी कविता और उसकी मां पहले ही बहुत भयभीत है उनको और भयभीत करना बहुत गलत होगा और उसे यह भी डर था कि कहीं कविता की मां मुझे मददगार आत्मा नहीं बल्कि भयानक भूत ना समझे।
क्या होगा जब कविता को पता चलेगा कि जिस जुगनू नाम के लड़के से वह दिलो जान से प्यार करती है उसकी मौत हो चुकी है। और क्या जुगनू पुनः अपने शरीर में प्रवेश करके जीवित हो जाएगा।