भय
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भय
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
भय बीते हादसों की छाया है, जो मन में घर कर जाती है। लेकिन धीरे-धीरे हिम्मत से आगे बढ़ने पर यह धुंध की तरह मिट जाती है।
: Simple Human
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