भय
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भय
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मेरे मन में एक साया है, भय का नाम है, चुपचाप बैठा है। नजर नहीं आता, लेकिन महसूस होता है, हर पल मेरे साथ, खामोशी में बोलता है। क्या यह भय मुझे कमजोर बनाता है? नहीं, यह मुझे जागरूक बनाता है।
लेखक : Jyoti kumari
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