कहां गए वो दिन
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कहां गए वो दिन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
माँ की दी पाई में खुशियाँ थी, पापा के सिक्के में दुनिया बसी। चाट-पकौड़ी, खिलौने, कहानियाँ, हर ख्वाहिश गुलक में ही फँसी।
लेखक : Rakesh
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