इस कविता "मां का प्यार" का सार यह है कि मां का प्रेम असीम और निःस्वार्थ होता है। वह हर दुख सहकर भी अपने बच्चे के लिए मुस्कुराती रहती है। मां की ममता सर्दी में गरम रजाई, गर्मी में ठंडी छांव और भूख में रोटी जैसी होती है। वह अपने सपनों को भूलकर भी अपने बच्चे के सपनों को पूरा करने में लगी रहती है। जब जीवन में मुश्किलें आती हैं, तब मां का प्यार और आशीर्वाद हमें सहारा देता है। मां का स्नेह हर परिस्थिति में संबल बना रहता है, चाहे हम कहीं भी हों।