समीर और रोहन बचपन के दोस्त थे, लेकिन जब सिया, जिसे दोनों पसंद करते थे, रोहन के करीब आई, तो समीर को जलन होने लगी। लालच और ईर्ष्या में, समीर ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत रोहन को पहाड़ी से गिराकर मार दिया और इसे एक दुर्घटना साबित कर दिया। लेकिन सिया ने यह सच सुन लिया और हमेशा के लिए समीर से दूर हो गई।
पांच साल बाद, समीर की जिंदगी में अजीब घटनाएँ होने लगती हैं। एक रात, उसे अपने घर में खून से लिखे शब्द, खुद-ब-खुद हिलती कुर्सियाँ और शीशे में रोहन की परछाई दिखती है। रोहन की आत्मा उसे उसके गुनाहों का अहसास कराती है और अंततः समीर की मृत्यु भय और पश्चाताप के कारण हो जाती है।
कहानी दिखाती है कि अपराध चाहे कितना भी छुपाया जाए, पश्चाताप और न्याय से बचना असंभव है।