वहां पहुंचने पर लोमड़ी को पिंकी बंदर गधे उल्लू के साथ देख बब्बर शेर बोलता है “गधे तू ठीक कह रहा था, यह पिंकी बंदर तेजी से भाग कर लोमड़ी से ही मदद मांगने गया था और फिर लोमड़ी से बब्बर शेर बोलता है “आज मैं लोमड़ी तेरी एक भी बात मानने वाला नहीं हूं, इस बिल्ली को एक सप्ताह में ऐसे ही उल्टा लटका कर रोज पिटुगा, क्योंकि यह चुगलखोर बिल्ली आए दिन पशु पक्षियों की चुगली करके उन्हें आपस में लड़वाती रहती है और खुद उस लड़ाई का पूरा आनंद उठाती है। इस चुगलखोर बिल्ली की वजह से हमारे जंगल के शांत माहौल में हद से ज्यादा शोर शराबा होने लगा है।”
बरगद के पेड़ पर रस्सी से उल्टी बंधकर लटकी हुई बिल्ली बब्बर शेर से बोलती है “आज के बाद मैं कसम खाती हूं, किसी की भी चुगली नहीं करुंगी और कुछ दिनों से तो मैंने वैसे भी चुगली करना छोड़ रखा है, नहीं तो मैं आपको कब का यह नहीं बता देती की कालू सूअर और गौरू सूअर जो शहद आपको खाने के लिए लाकर देते हैं, आप उस शहद को अकेले ही सबसे ज्यादा खाते हो, यह बात भालू बोल रहा था और बताओ क्या मैंने आज तक आपको बताई क्या।”