तुम्हे याद तो है ना
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तुम्हे याद तो है ना
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जिसे उसके अपने लोग छोड़कर चले गए, लेकिन उसकी दीवारें, आंगन, और पुरानी यादें अब भी उन लम्हों को संजोए हुए हैं। हर कोना बीते वक्त की गवाही देता है और खामोशी में बस एक सवाल गूंजता है— "तुम्हें याद तो है ना?"
: Simple Human
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