"आखिरी पल का प्यार" राघव और सिया की एक भावनात्मक प्रेम कहानी है। कॉलेज में मिले दोनों का प्यार गहराता गया, लेकिन करियर के चलते वे दूर हो गए। सिया को ब्लड कैंसर हो गया, लेकिन उसने राघव को यह बात नहीं बताई। जब राघव को पता चला, तो वह सब छोड़कर उसके पास लौट आया। सिया ने उसकी बाँहों में आखिरी सांस ली, लेकिन उसका प्यार राघव की यादों में अमर हो गया। सिया की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए राघव बच्चों को पढ़ाने लगा और उसकी याद में "आखिरी पल का प्यार" नाम की किताब लिखी।