नसीब
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नसीब
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी हँसाए, कभी रुलाए, कभी धूप तो कभी छाँव दिखाए। नसीब की इस अजब कहानी, कभी सुनहरी, कभी बेगानी।
लेखक : Aastha
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