गाँव सुनहरा का सूरज धीरे-धीरे पहाड़ियों के पीछे छिप रहा था। खेतों में पसरी शांति को तोड़ते हुए बैल गाड़ियों की चूँ-चूँ और मजदूरों की थकी-हारी आवाजें हवा में घुल रही थीं। लेकिन इस शांति के पीछे एक ऐसी कड़वी सच्चाई छिपी थी, जिसने न जाने कितनी जिंदगियों को निगल लिया था—जात-पात का ज़हर।