जीवन का सार
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जीवन का सार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जीवन एक बहता दरिया है, ना रुकता, ना ठहरता, कभी धूप की तपिश झेलता, कभी सावन में बहता। कभी हंसी की कलियां खिलतीं, कभी ग़म की शामें आतीं, कभी उम्मीदें पंख लगातीं, कभी तकदीर रुलाती।
: Erica
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