तब दोनों आसमान की तरफ देखकर एक दूसरे से कहते हैं “जिन्हें अजान मंदिर के घंटों की आवाज सुनाई दे रही है, वह फिर भी अशांत है और जिसे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा वह शांति सुकून से मीठे-मीठे फल खा रहा है और हम दोनों सृष्टि रचयिता की रक्षा करने चले थे, उसकी रक्षा करते-करते हम दोनों ने अपना भविष्य पता कर लिया है, हम दोनों ने अपने-अपने परिवार का बुढ़ापे में विनाश करवा कर अपना अपना वर्तमान खराब कर लिया है, और वर्तमान ही भविष्य बनता है।