अमृता और कबीर की कहानी अधूरी चाहत और बिछड़ने के दर्द की दास्तां है। अमृता कबीर से बेइंतहा प्यार करती थी, मगर एक दिन वो अचानक उसकी ज़िंदगी से चला गया। अमृता ने उसे ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो कहीं नहीं मिला।
वो कबीर की चिट्ठियों, डायरी और यादों में उलझी रही, उसे तलाशती रही, मगर हर रास्ता खाली था। फिर एक दिन उसे पता चला कि कबीर अब इस दुनिया में नहीं है।
अमृता को यकीन नहीं हुआ, लेकिन कबीर की डायरी के आखिरी पन्ने ने उसे सच का सामना करा दिया— "कुछ लोग कहानियों में अमर हो जाते हैं, पर हकीकत में हमेशा अधूरे रह जाते हैं।"
अमृता की ज़िंदगी ठहर गई, उसकी मोहब्बत अधूरी रह गई। और उसकी दास्तां, बस एक अधूरी दास्तां बनकर रह गई।