बदलते लोग
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बदलते लोग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
दिन बदलता, रात बदलती, हरपल वक़्त बदलता है। जैसे सूरज चंदा चमके, वैसे लोग बदलते हैं।
: Hemlata sahu
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