बदलते लोग
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बदलते लोग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी जो साथ चलते थे, वही अब दूर रहते हैं, कभी जो पास आते थे, वही मजबूर रहते हैं। वो हँसी के पल, वो वादों के सिलसिले, अब बस धुंधली यादों में कहीं खो चुके हैं।
: Aastha
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