सपनो का घर
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सपनो का घर
कविता
कविता
सपनों का घर छोटा ही सही, मगर उसमें प्यार, सुकून और खुशियों की छाँव हो। जहाँ हँसी-ठिठोली हो, सुकून भरी ठंडी हवा चले, और रिश्तों में बस अपनापन झलके। छल-कपट से दूर, एक नन्हा सा संसार, जहाँ हर लम्हा खुशगवार हो।
: Simple Human
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