बदलते लोग
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बदलते लोग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
बदल रही, दुनिया, बदल रहे है, लोग पर तू खुद पर अवश्य लगाना, रोक स्वार्थ खातिर प्रभु के लगाते है, धोक ऐसे को न बता कभी मन के बोल
लेखक : Anju sahu
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