मौत आई एक साया बनकर
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मौत आई एक साया बनकर
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
चुपके से आती, आहट नहीं, सांसें रोकती, रहमत नहीं। न राजा, न रंक को छोड़े, सबको अपने संग ही जोड़े।
: Saraswati
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