वो नज़रें कौन सी हैं
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वो नज़रें कौन सी हैं
कविता
कोई चाह के भी मुझको तोड़ नहीं पाता; मेरे दिल से लफ्जों का परदा हो नहीं पाता; बड़ी लंबी सी चादर है मेरे ख्वाबों की, चाह कर भी समंदर कभी सो नहीं पाता ..!
लेखक : Nayii Kalam
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