मेरे दादाजी
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मेरे दादाजी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
नर्म छांव जैसे, मीठी बातों के सागर, मेरे दादाजी हैं, प्यार का आंगन। गहरी सोच के, अनुभव के बादल, हर राह दिखाएं, हर मुश्किल का हल।
लेखक : Aastha
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